बिहार की राजनीति में इस समय सिर्फ़ बड़ी-बड़ी बातें सुनने को मिल रही हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
मुख्यमंत्री बार-बार वादों और योजनाओं का ऐलान तो कर रहे हैं, पर असलियत यह है कि ज़्यादातर काम अधर में लटके हुए हैं।
सड़क, रोज़गार, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे अहम मुद्दों पर कोई ठोस प्रगति नज़र नहीं आ रही।
जनता का कहना है कि नेताओं की भाषणबाज़ी से पेट नहीं भरता, उन्हें चाहिए विकास के ठोस कदम।
अब सवाल ये उठता है – क्या बिहार में सिर्फ़ वादे ही वादे रहेंगे, या कभी काम भी पूरा होगा?






